मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में घोषणा को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में घोषणा को मंजूरी दे दी है।
तमिलनाडु में मंदिरों के शहर के रूप में प्रसिद्ध मदुरै स्थित मदुरै हवाई अड्डा राज्य के सबसे पुराने हवाई अड्डों में से एक है। यह दक्षिणी तमिलनाडु के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है और पर्यटन एवं तीर्थयात्रा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास में योगदान होता है।
मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्रियों और व्यवसायों को आकर्षित करने की हवाई अड्डे की क्षमता शहर के ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज जल शक्ति मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसमें जल जीवन मिशन (जेजेएम) के कार्यान्वयन को बुनियादी ढांचे के निर्माण से पुनर्गठित करने और इसे सेवा वितरण की ओर मोड़ने की बात कही गई है। इसकी पेयजल व्यवस्था और स्थायी ग्रामीण पाइपलाइन से पीने योग्य पानी की आपूर्ति के लिए संस्थागत इकोसिस्टम द्वारा सहायता की जाएगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए जेजेएम के पुनर्गठन के लिए, कुल परिव्यय को बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है, जिसमें कुल केंद्रीय सहायता 3.59 लाख करोड़ रुपये है। यह 2019-20 में स्वीकृत 2.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, यानी 1.51 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त केंद्रीय हिस्सा है।
इस उद्देश्य से, एक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा, जिसे “सुजलम भारत” कहा जाएगा, स्थापित किया जाएगा, जिसके तहत प्रत्येक गांव को एक विशिष्ट सुजल गांव/सेवा क्षेत्र आईडी आवंटित की जाएगी, जो स्रोत से नल तक संपूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण करेगी। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए , “जल अर्पण” के माध्यम से योजनाओं के शुभारंभ और औपचारिक हस्तांतरण में ग्राम पंचायतों और पशु एवं जल आपूर्ति समितियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
ग्राम पंचायत राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त संचालन एवं रखरखाव तंत्र स्थापित किए जाने की पुष्टि होने पर ही कार्यों के पूर्ण होने का प्रमाण पत्र जारी करेगी और स्वयं को “हर घर जल” घोषित करेगी। सामुदायिक स्वामित्व और भागीदारी को परिचालन दक्षता और जल स्रोत की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए, यह कार्यक्रम “जल उत्सव” को एक वार्षिक, समुदाय-नेतृत्व वाले रखरखाव एवं समीक्षा कार्यक्रम के रूप में बढ़ावा देगा, जिसमें स्थानीय सांस्कृतिक मूल्यों को शामिल करते हुए पेयजल की सुरक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी को सुदृढ़ किया जाएगा।
वर्ष 2019 में नल-जल कनेक्शन वाले 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों की आधारभूत स्थिति से, अब तक जल जीवन मिशन (जेजेएम) योजना के तहत 12.56 करोड़ से अधिक अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को नल-जल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। वर्तमान में, देश में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा चिन्हित 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से, लगभग 15.80 करोड़ (81.61 प्रतिशत) परिवारों के पास नल-जल कनेक्शन उपलब्ध हैं।
वास्तविक उपलब्धियों के अतिरिक्त, जेजेएम के प्रभावों का आकलन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों/व्यक्तियों द्वारा किया गया है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, जेजेएम ने 9 करोड़ महिलाओं को पानी ढोने के काम से मुक्त किया है, जिससे वे अन्य आर्थिक कार्यकलापों में अधिक भागीदारी कर पा रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अनुमान लगाया है कि जेजेएम से महिलाओं के श्रमसाध्य कार्य में प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे की बचत हुई है, डायरिया से होने वाली 4 लाख मौतों को रोका जा सका है और 14 मिलियन विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष (डीएएलवाई) की बचत हुई है। नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर माइकल क्रेमर ने पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 30 प्रतिशत की संभावित कमी का अनुमान लगाया है, जिससे प्रतिवर्ष 1,36,000 बच्चों की जान बचाई जा सकती है; आईआईएम बैंगलोर और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने जेजेएम के माध्यम से 59.9 लाख प्रत्यक्ष और 2.2 करोड़ अप्रत्यक्ष व्यक्ति-वर्ष के संभावित रोजगार सृजन का अनुमान लगाया है, जिससे ग्रामीण आजीविका मजबूत हुई है। महिलाएं और बालिकाएं इस पहल की प्रमुख लाभार्थी बनकर उभरी हैं, जिन्हें श्रमसाध्य कार्य में कमी, बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छता, बढ़ी हुई गरिमा और शिक्षा एवं आजीविका कार्यकलापों के अधिक अवसरों के रूप में महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त हुए हैं।
जेजेएम 2.0 देश भर के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को दिसंबर 2028 तक नल-जल कनेक्शन उपलब्ध कराकर सभी ग्राम पंचायतों को ‘हर घर जल’ के प्रमाणन में सहयोग देगा। साथ ही, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ अलग-अलग समझौता ज्ञापनों के माध्यम से समय-सीमा का पालन, योजना की निरंतरता और नागरिक-केंद्रित जल सेवाओं का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। जेजेएम 2.0 संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से अवसंरचना-केंद्रित दृष्टिकोण से नागरिक-केंद्रित उपयोगिता-आधारित सेवा वितरण दृष्टिकोण की ओर बढ़ते हुए, 24×7 सुनिश्चित ग्रामीण पेयजल आपूर्ति के साथ विकसित भारत @2047 के विजन को भी बढ़ावा देता है।
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत, भारत सरकार के समग्र दृष्टिकोण के साथ, ग्रामीण जल आपूर्ति अवसंरचना के सतत और दीर्घकालिक संचालन एवं रखरखाव तथा योजना स्रोत के निरंतर संचालन के लिए विभिन्न विभागों के बीच रणनीतिक समन्वय की परिकल्पना भी की गई है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज उत्तर प्रदेश और हरियाणा में हाइब्रिड वार्षिकी आधार पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना उपमार्ग से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक नए सड़क निर्माण के लिए 3630.77 करोड़ रुपये के संशोधित परिव्यय को स्वीकृति दे दी।
31.42 किलोमीटर लंबा यह गलियारा दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सीधी और उच्च गति का संपर्क मार्ग होगा जिससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आर्थिक विकास और प्रचालन दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।
यह गलियारा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ेगा जिससे बहुआयामी परिवहन संभव होगा। यह उच्च गलियारा संरचनात्मक सुधार के साथ ही शहरी अवसंरचना परिवर्तन, क्षेत्रीय संपर्क और राष्ट्रीय परिचालन दक्षता का महत्वपूर्ण साधन होगा। जेवर हवाई अड्डे -दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे कॉरिडोर की पूरी क्षमता के उपयोग और फरीदाबाद में सतत शहरी विकास सुनिश्चित करने के लिए इसका निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
इस परियोजना का लगभग 11 किलोमीटर लंबा हिस्सा एलिवेटेड मार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा जो डीएनडी-बल्लभगढ़ बाईपास और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच नए संपर्क मार्ग का महत्वपूर्ण खंड है और इसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ता है। यह गलियारा फरीदाबाद मास्टर प्लान, 2031 के तहत घनी आबादी वाले शहरी विकास और भविष्य के बुनियादी ढांचे के विस्तार के निर्धारित क्षेत्र से होकर गुजरेगा। प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर की अतिरिक्त लागत 689.24 करोड़ रुपये है। हरियाणा सरकार ने इसमें 450 करोड़ रुपये वहन करने पर सहमति जताई है।
दिल्ली-मुंबई मार्ग के दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना उपमार्ग से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक नए संपर्क मार्ग की परियोजना का संरेखण मानचित्र

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने आज एनएच-752डी के बदनावर-पेटलावाद-थंदला-तिमारवानी खंड से 80.45 किलोमीटर लंबे चार लेन के कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दे दी है, जिसकी कुल पूंजी लागत 3,839.42 करोड़ रुपये है।
स्वीकृत कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर तिमारवानी इंटरचेंज से जोड़ेगा।
प्रस्तावित चार-लेन परियोजना कॉरिडोर का प्राथमिक उद्देश्य यात्रा दक्षता में सुधार करना है और इससे यात्रा के समय में लगभग एक घंटे की कमी आने की उम्मीद है। उज्जैन-बदनावर खंड (70.40 किमी) को पहले ही 2-लेन से 4-लेन में अपग्रेड किया जा चुका है। बदनावर-तिमारवानी खंड वर्तमान में एक मध्यवर्ती लेन (5.5 मीटर) है जिसकी बनावट त्रुटिपूर्ण (गति 20-50 किमी प्रति घंटा) है। इस खंड को अपग्रेड करने से उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर तिमारवानी इंटरचेंज तक सीधी 4-लेन कनेक्टिविटी पूरी हो जाएगी, जिस पर गति 80-100 किमी प्रति घंटा होगी।
तिमारवानी-थंदला-पेटलावाद-बदनावर-उज्जैन कॉरिडोर गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन जाने वाले यातायात का सबसे छोटा मार्ग है। तिमारवानी-बदनावर खंड के उन्नयन से अंतरराज्यीय संपर्क मजबूत होगा और यातायात की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित होगी। साथ ही, अप्रैल 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान यातायात में होने वाली भारी वृद्धि को भी संभाला जा सकेगा।
बदनावर-पेटलावाद-थंगला-तिमारवानी खंड धार और झाबुआ जिलों के आदिवासी क्षेत्रों से होकर गुजरता है। धार जिले के कुछ हिस्से नीति आयोग के आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के अंतर्गत आते हैं। इस खंड के उन्नयन से उज्जैन-बदनावर-तिमारवानी कॉरिडोर से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक सीधा और त्वरित मार्ग उपलब्ध होगा। इस बेहतर संपर्क से रसद लागत कम होगी, कच्चे माल और तैयार माल की कुशल आवाजाही में सुविधा होगी और इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन और देवास में स्थित औद्योगिक केंद्रों/एमएमएलपी तक पहुंच मजबूत होगी।
प्रस्तावित परियोजना उच्च गति कनेक्टिविटी प्रदान करती है, जिसे बेहतर सुरक्षा और निर्बाध यातायात के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे यात्रा का समय, भीड़भाड़ और परिचालन लागत कम होगी। महत्वपूर्ण रूप से, यह परियोजना क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी, जिससे मध्य प्रदेश राज्य के धार और झाबुआ जिलों के समग्र आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।
इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
| क्र.सं. | परियोजना की विशेषताएं | विवरण |
| 1 | लंबाई | 80.45 किमी (ग्रीनफील्ड + ब्राउनफील्ड) कॉरिडोर |
| 2 | फुटपाथ का प्रकार | लचीला फुटपाथ |
| 3 | प्रस्तावित विन्यास | 4 लेन |
| 4 | प्रमुख पुल | 06 |
| 5 | छोटे पुल | 34 |
| 6 | पुल के नीचे की सड़क (आरयूबी) | 01 |
| 7 | वीयूपी /एलवीयूपी / एसवीयूपी | 09 /29/04 |
| 8 | निर्माण अवधि | 24 माह |
| 9 | रियायत अवधि | 17 वर्ष (निर्माण अवधि 2 वर्ष + रखरखाव अवधि 15 वर्ष) |
अनुलग्नक–I

मंत्रिमंडल ने पश्चिम बंगाल और झारखंड के 5 जिलों को शामिल करने वाली दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को स्वीकृति दी, इससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 192 किलोमीटर की वृद्धि होगी
इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 4,474 करोड़ रुपये है और ये वर्ष 2030-31 तक पूरी हो जाएंगी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 4,474 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। इन परियोजनाओं में शामिल हैं:
- सैंथिया-पाकुड़ चौथी लाइन
- संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन
बढ़ी हुई रेल लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने में सहायता मिलेगी। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध आवागमन के लिए कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।
पश्चिम बंगाल और झारखंड राज्यों के 5 जिलों को शामिल करने वाली 2 परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 192 किलोमीटर तक बढ़ाएंगी।
स्वीकृत मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना लगभग 5,652 गांवों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिनकी आबादी लगभग 147 लाख है।
प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों, जैसे बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदिकेश्वरी मंदिर (शक्तिपीठ), तारापीठ (शक्तिपीठ), पटाचित्र ग्राम, धडिका वन, भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य, रामेश्वर कुंड आदि के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा।
स्वीकृत परियोजनाएं कोयला, पत्थर, डोलोमाइट, सीमेंट, स्लैग, जिप्सम, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, पीओएल, कंटेनर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप प्रति वर्ष 31 मिलियन टन माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम होने के नाते, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में सहायता करेगा, तेल आयात (6 करोड़ लीटर) को कम करेगा और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (28 करोड़ किलोग्राम) को कम करेगा, जो 1 करोड़ पौधारोपण के बराबर है।
