कैबिनेट ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत निजी भागीदार को शामिल करते हुए दीर्घकालिक लाइसेंस के माध्यम से नागपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उन्नयन और आधुनिकीकरण को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) द्वारा एमआईएल (मिहान इंडिया लिमिटेड) को पट्टे पर दी गई भूमि की लीज अवधि को 06.08.2039 से आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, ताकि एमआईएल वाणिज्यिक संचालन तिथि (सीओडी) से 30 वर्षों के लिए नागपुर हवाई अड्डे का लाइसेंस रियायतग्राही, अर्थात् जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएनआईएएल) को दे सके।
यह नागपुर हवाई अड्डे के लिए नागपुर में मल्टी-मोडल इंटरनेशनल कार्गो हब और एयरपोर्ट (मिहान) परियोजना के तहत क्षेत्रीय विमानन केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
वर्ष 2009 में एएआई और महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (एमएडीसी) द्वारा 49:51 के इक्विटी अनुपात में एक संयुक्त उद्यम कंपनी (जेवीसी) – एमआईएल का गठन किया गया था। हालांकि एएआई की हवाई अड्डे की संपत्तियां वर्ष 2009 में हवाई अड्डे के संचालन के लिए एमआईएल को हस्तांतरित कर दी गई थीं, लेकिन भूमि सीमांकन संबंधी मुद्दों के कारण लीज डीड में देरी हुई। बाद में, एएआई की भूमि 06.08.2039 तक एमआईएल को लीज पर दी गई है।
वर्ष 2016 में एमआईएल ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत हवाई अड्डे के संचालन के लिए एक भागीदार की पहचान हेतु वैश्विक निविदा जारी की। जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड (जीएएल) 5.76 प्रतिशत के राजस्व हिस्से के साथ उच्चतम बोलीदाता के रूप में उभरी। बाद में इसे संशोधित करके सकल राजस्व का 14.49 प्रतिशत कर दिया गया। इसके बाद, एमआईएल ने मार्च 2020 में बोली प्रक्रिया रद्द कर दी। जीएएल ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में इस रद्द करने को चुनौती दी। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी जीएएल के पक्ष में फैसला सुनाया। 27 सितंबर, 2024 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, एमआईएल ने 8 अक्टूबर, 2024 को अन्य संयुक्त उद्यम, जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएनआईएएल) के साथ रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए।
नागपुर हवाई अड्डे के एक नए युग की शुरुआत:
एएआई द्वारा एमआईएल को लीज पर दी गई भूमि की अवधि 06.08.2039 के बाद बढ़ाए जाने से, यह जीएनआईएएल की 30 वर्षीय रियायत अवधि के साथ समाप्त हो जाएगी, जिससे हवाई अड्डे को दूसरे संयुक्त उद्यम-जीएनआईएएल को सौंपने का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे नागपुर हवाई अड्डे के विकास और अवसंरचना उन्नति के एक नए युग की शुरुआत होने की उम्मीद है। निजी क्षेत्र की दक्षता और सरकारी निगरानी के साथ, हवाई अड्डे में महत्वपूर्ण निवेश, आधुनिकीकरण और बेहतर यात्री एवं माल ढुलाई सेवाओं की संभावना है – जो सरकार की विमानन क्षेत्र में मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की परिकल्पना का हिस्सा है।
जीएनआईएएल नागपुर के डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को विश्व स्तरीय सुविधा में बदलने का कार्य शुरू करेगा। चरणबद्ध विकास के तहत इसकी अंतिम क्षमता 30 मिलियन यात्रियों को प्रतिवर्ष संभालने की होगी, जिससे यह मध्य भारत के प्रमुख हवाई अड्डों में से एक बन जाएगा। यह परिवर्तन न केवल विदर्भ क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा, बल्कि इसके आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करेगा। इससे माल ढुलाई क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 37,500 करोड़ रुपये के परिव्यय से सतह के निकट स्थित कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं की प्रोत्साहन योजना को स्वीकृति दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय से पृथ्वी की सतह के निकट पाये जाने वाले कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दे दी है।
यह योजना भारत के कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण कार्यक्रम में तेजी लाने, वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और तरलीकृत प्राकृतिक गैस – एलएनजी (50 प्रतिशत से अधिक आयात), यूरिया (20 प्रतिशत आयात), अमोनिया (100 प्रतिशत आयात) और मेथनॉल (80-90 प्रतिशत आयात) जैसे प्रमुख उत्पादों की आयात निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम है।
सरकार ने साथ ही एक महत्वपूर्ण सुधार के तहत, गैर-विनियमित क्षेत्र (एनआरएस) लिंकेज नीलामी ढांचे में कोयले को सिंथेटिक गैस में परिवर्तित करने की उत्पादन प्रक्रिया उप-क्षेत्र के तहत कोयला लिंकेज (कोयला उत्पादक कंपनियों और कोयला उपभोक्ताओं संयंत्र या उद्योग के बीच दीर्घकालिक आपूर्ति समझौता) की अवधि 30 वर्ष तक बढ़ा दी है, जिससे कोयला गैसीकरण परियोजनाओं में निवेश के लिए दीर्घकालिक नीतिगत निश्चितता मिलेगी।
योजना की प्रमुख विशेषताएं:
- सिंथेटिक गैस और इसके सह-उत्पादों के लिए सतह के समीप के कोयला/लिग्नाइट नई गैसीकरण परियोजनाएं प्रोत्साहित करने के लिए 37,500 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय किया गया है, जिसका लक्ष्य लगभग 75 मिलियन टन कोयला/लिग्नाइट का गैसीकरण करना है।
- संयंत्र और मशीनरी की लागत के अधिकतम 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है।
- परियोजना की लागत, कोयले की खपत और सिंथेटिक गैस उत्पादन मानकीकरण मूल्यांकन ढांचे के साथ, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से कंपनियों का चयन किया जाएगा।
- परियोजना के लक्ष्यों से जुड़ी चार समान किस्तों में प्रोत्साहन राशि वितरित की जाएगी।
- किसी एक परियोजना के लिए वित्तीय प्रोत्साहन की अधिकतम सीमा पांच हजार करोड़ रुपये है; किसी एक उत्पाद (सिंथेटिक प्राकृतिक गैस और यूरिया को छोड़कर) के लिए अधिकतम सीमा नौ हजार करोड़ रुपये और किसी एक इकाई समूह के लिए सभी परियोजनाओं की अधिकतम सीमा 12 हजार करोड़ रुपये है।
- इस योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन, वाणिज्यिक कोयला खनन व्यवस्था या अन्य केंद्रीय/राज्य सरकारी मंत्रालयों की योजनाओं के अंतर्गत दिए जाने वाले प्रोत्साहनों के अतिरिक्त है और उन्हें प्रतिबंधित नहीं करता।
- यह योजना तकनीक-स्वतंत्र दृष्टिकोण से प्रेरित है जो किसी विशेष तकनीक तक सीमित नहीं है। इसमें स्वदेशी तकनीक अपनाने को प्रोत्साहित किया गया है।
रणनीतिक और आर्थिक लाभ:
- अनुमानित निवेश प्राप्तिकरण: 2.5-3.0 लाख करोड़ रुपये।
- ऊर्जा सुरक्षा और आयात प्रतिस्थापन: कोयला संसाधनों के विविध उपयोग और तरलीकृत प्राकृतिक गैस, यूरिया, अमोनिया, अमोनियम नाइट्रेट, मेथनॉल और कोकिंग कोयले के आयात का विकल्प प्रदान करना, भारत को वैश्विक मूल्य अस्थिरता और भू-राजनीतिक आपूर्ति-श्रृंखला बाधाओं से सुरक्षित बनाना और आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के उद्देश्यों को आगे बढ़ाना।
- रोजगार सृजन: इस योजना के अंतर्गत कोयला उत्पादन क्षेत्रों में स्थित 25 परियोजनाओं में लगभग 50 हजार (प्रत्यक्ष + अप्रत्यक्ष) रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान।
- सरकारों को राजस्व: योजना के तहत अनुमानित 75 मिलियन टन गैसीकरण में कोयला/लिग्नाइट उपयोग से सालाना 6,300 करोड़ रुपये का लाभ प्राप्त होने की उम्मीद है। साथ ही माल और सेवा कर (जीएसटी) और अन्य करों से भी राजस्व प्राप्त होगा।
- प्रौद्योगिकी पारितंत्र: स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देकर और विदेशी ईपीसी (निर्माण या औद्योगिक परियोजनाओं में इंजीनियरिंग, खरीद सामग्री और निर्माण की पूरी जिम्मेदारी के अनुबंध) ठेकेदारों पर निर्भरता कम करके भारत की घरेलू सतह के निकट स्थित कोयले की गैसीकरण क्षमता सुदृढ़ होगी।
पृष्ठभूमि:
भारत के पास विश्व के सबसे बड़े कोयला भंडारों में से एक (लगभग 401 अरब टन) और लिग्नाइट (कोयले का एक निम्न प्रकार) का लगभग 47 अरब टन भंडार है। देश के ऊर्जा मिश्रण में कोयले की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से अधिक है। गैसीकरण प्रक्रिया द्वारा कोयले/लिग्नाइट को सिंथेटिक गैस (सिन्गैस) में परिवर्तित किया जाता है, जो घरेलू स्तर पर ईंधन और रसायनों के उत्पादन के लिए बहुउपयोगी कच्चा माल है। इससे भारत उच्च मूल्य वाले आयातों का वैकल्पिक केंद्र बन सकता है और वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान और मूल्य अस्थिरता से बचा रह सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक स्थिति ने देश की इस कमजोरी को और उजागर कर दिया है, जिसके कारण वित्त वर्ष 2025 में एलएनजी, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, अमोनिया, कोकिंग कोल, मेथनॉल, डीएमई और अन्य प्रमुख प्रतिस्थापन योग्य उत्पादों में भारत का आयात बिल लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा।
राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (2021) और जनवरी 2024 में स्वीकृत 8,500 करोड़ रुपये की योजना (इसके तहत 6,233 करोड़ रुपये की 8 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं) के आधार पर यह नई योजना बेहतर समर्थन के साथ तेज गति में आगे बढ़ेगी।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने गुजरात के अहमदाबाद जिले को शामिल करने वाली एक नई परियोजना को मंजूरी दी है, जिससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 134 किलोमीटर की वृद्धि होगी
इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 20,667 करोड़ रुपये है और यह 2030-31 तक पूरी हो जाएगी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने रेल मंत्रालय की लगभग 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाली अहमदाबाद (सरखेज) – धोलेरा सेमी हाई-स्पीड दोहरी लाइन परियोजना को मंजूरी दी है। स्वदेशी रूप से विकसित तकनीक से निर्मित भारतीय रेलवे की यह पहली सेमी हाई-स्पीड परियोजना होगी।
इस परियोजना खंड से अहमदाबाद, धोलेरा एसआईआर, धोलेरा का आगामी हवाई अड्डा और लोथल राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (एनएचएमसी) के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा। अहमदाबाद को धोलेरा से जोड़ने से यात्रियों का यात्रा समय कम होगा, जिससे दैनिक आवागमन आरामदायक होगा और एक ही दिन में वापसी यात्रा संभव हो सकेगी। यह सेमी हाई-स्पीड रेलवे न केवल दो शहरों को करीब लाएगा, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों को भी एक-दूसरे के करीब लाएगा।
भारत की पहली सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना के रूप में यह परियोजना एक अग्रणी परियोजना के रूप में काम करेगी और देश भर में सेमी हाई-स्पीड रेल के चरणबद्ध विस्तार के लिए एक संदर्भ मॉडल के रूप में कार्य करेगी।
इस नये रेल लाइन प्रस्ताव से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी और आवागमन में सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की कार्यकुशलता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। यह परियोजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। इससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
इस परियोजना को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टीमॉडल संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।
गुजरात के अहमदाबाद जिले को शामिल करने वाली इस परियोजना से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 134 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
प्रस्तावित परियोजनाओं से लगभग 284 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 5 लाख है।
पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन साधन होने के कारण रेलवे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक लागत को कम करने, तेल आयात (0.48 करोड़ लीटर) को कम करने और कार्बनडाई ऑक्साइड उत्सर्जन (2 करोड़ किलोग्राम) को कम करने में मदद करेगा, जो 10 लाख पेड़ लगाने के बराबर है।
कैबिनेट ने विपणन सीजन 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने विपणन सीजन 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दे दी है।
सरकार ने वर्ष 2026-27 के विपणन सीजन के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि की है, ताकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके। पिछले वर्ष की तुलना में एमएसपी में सबसे अधिक वृद्धि सूरजमुखी के बीज (622 रुपये प्रति क्विंटल), उसके बाद कपास (557 रुपये प्रति क्विंटल), नाइजरसीड (515 रुपये प्रति क्विंटल) और तिल (500 रुपये प्रति क्विंटल) के लिए संस्तुति की गई है।
विपणन सीजन 2026-27 के लिए सभी खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य:
(रुपये प्रति क्विंटल)
| क्र.सं. |
फसल |
एमएसपी 2026-27 |
लागत* केएमएस 2026-27 |
लागत पर मार्जिन (%) |
एमएसपी |
एमएस एमएसपी में 2026-27 में वृद्धि | |||
|
अनाज |
2025-
26 |
2013-
14 |
2025-26 के दौरान | 2013-14 के दौरान | |||||
| 1. |
धान |
सामान्य | 2441 | 1627 | 50 | 2369 | 1310 | 72 | 1131
(86%) |
| ग्रेड ए^ | 2461 | – | – | 2389 | 1345 | 72 | 1116
(83%) |
||
| 2. |
ज्वार |
हाइब्रिड | 4023 | 2682 | 50 | 3699 | 1500 | 324 | 2523
(168%) |
| मालदंडी
^ |
4073 | – | – | 3749 | 1520 | 324 | 2553
(168%) |
||
| 3. | बाजरा | 2900 | 1858 | 56 | 2775 | 1250 | 125 | 1650
(132%) |
|
| 4. | रागी | 5205 | 3470 | 50 | 4886 | 1500 | 319 | 3705
(247%) |
|
| 5. | मक्का | 2410 | 1544 | 56 | 2400 | 1310 | 10 | 1100
(84%) |
|
| दलहन | |||||||||
| 6. | तुर / अरहर | 8450 | 5496 | 54 | 8000 | 4300 | 450 | 4150
(97%) |
|
| 7. | मूंग | 8780 | 5438 | 61 | 8768 | 4500 | 12 | 4280
(95%) |
|
| 8. | उरद | 8200 | 5418 | 51 | 7800 | 4300 | 400 | 3900
(91%) |
|
| तिलहन | |||||||||
| 9. | मूंगफली | 7517 | 5011 | 50 | 7263 | 4000 | 254 | 3517
(88%) |
|
| 10. | सूरजमुखी के बीज | 8343 | 5562 | 50 | 7721 | 3700 | 622 | 4643
(125%) |
|
| 11। | पीली सोयाबीन | 5708 | 3805 | 50 | 5328 | 2560 | 380 | 3148
(123%) |
|
| 12. | तिल | 10346 | 6897 | 50 | 9846 | 4500 | 500 | 5846
(130%) |
|
| 13. | नाइजरसीड | 10052 | 6701 | 50 | 9537 | 3500 | 515 | 6552
(187%) |
|
| व्यावसायिक | |||||||||
| 14. |
कपास |
(मध्यम रेशा) | 8267 | 5511 | 50 | 7710 | 3700 | 557 | 4567
(123%) |
| (लंबा रेशा) ^ | 8667 | – | – | 8110 | 4000 | 557 | 4667
(117%) |
||
*इसमें सभी भुगतान की गई लागतें शामिल हैं, जैसे कि किराए पर लिए गए मानव श्रम, बैल श्रम/मशीन श्रम, पट्टे पर ली गई भूमि के लिए भुगतान किया गया किराया, बीज, उर्वरक, खाद जैसे कच्चे माल के उपयोग पर होने वाले खर्च, सिंचाई शुल्क, औजारों और कृषि भवनों पर मूल्यह्रास, कार्यशील पूंजी पर ब्याज, पंप सेट के संचालन के लिए डीजल/बिजली आदि, विविध खर्च और पारिवारिक श्रम का अनुमानित मूल्य।
धान (ग्रेड ए), ज्वार (मालदंडी) और कपास (लंबे रेशे वाली) के लिए लागत डेटा अलग से संकलित नहीं किया गया है।
विपणन सत्र 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के एमएसपी में वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना पर निर्धारित करने की घोषणा के अनुरूप है। किसानों को उत्पादन लागत पर मिलने वाला अपेक्षित लाभ मूंग (61 प्रतिशत) में सबसे अधिक (इसके बाद बाजरा (56 प्रतिशत), मक्का (56 प्रतिशत) और अरहर (54 प्रतिशत) में होगा। शेष फसलों के लिए, किसानों को उत्पादन लागत पर मिलने वाला लाभ 50 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
हाल के वर्षों में, सरकार फसलों के लिए उच्च एमएसपी की पेशकश करके अनाज के अलावा अन्य फसलों जैसे दलहन और तिलहन तथा पोषक अनाज/श्री अन्न की खेती को बढ़ावा दे रही है।
2014-15 से 2025-26 की अवधि के दौरान धान की खरीद 8418 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि 2004-05 से 2013-14 की अवधि के दौरान धान की खरीद 4590 लाख मीट्रिक टन थी।
2014-15 से 2025-26 की अवधि के दौरान, 14 खरीफ फसलों की खरीद 8746 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि 2004-05 से 2013-14 की अवधि के दौरान, खरीद 4679 लाख मीट्रिक टन थी।
2014-15 से 2025-26 की अवधि के दौरान धान उत्पादक किसानों को भुगतान की गई एमएसपी राशि 16.08 लाख करोड़ रुपये थी, जबकि 2004-05 से 2013-14 की अवधि के दौरान किसानों को भुगतान की गई राशि 4.44 लाख करोड़ रुपये थी।
2014-15 से 2025-26 की अवधि के दौरान, 14 खरीफ फसलों की खेती करने वाले किसानों को भुगतान की गई एमएसपी राशि 18.99 लाख करोड़ रुपये थी, जबकि 2004-05 से 2013-14 की अवधि के दौरान किसानों को भुगतान की गई एमएसपी राशि 4.75 लाख करोड़ रुपये थी।
